चामुंडा देवी मंदिर के बारे में जाने जो शक्तिपीठों में एक है

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चामुंडा देवी मंदिर के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी

चामुंडा देवी मंदिर हिमाचल के जिला कांगड़ा में स्थित एक शक्तिपीठ है  यह मंदिर चामुंडा नंदिकेश्वर धाम के नाम से भी जाना जाता है।

यह मंदिर कांगड़ा से 24 km की दूरी पर स्थित है और धर्मशाला से 15 km की दूरी पर स्थित है यह मंदिर शक्ति के 51 शक्तिपीठों में से एक है ! यह मंदिर मुख्य रूप से माँ काली के लिए समर्पित है और इस मंदिर की बहुत ज्यादा मान्यता है इस मंदिर में नवरात्रों के दौरान देश के कोने-कोने भक्तो की भीड़ लगी रहती है यहाँ पर माँ चामुंडा के साथ  भगवान् शिव का नंदिकेश्वर स्वपरूप स्थापित है अर्थात यह की यहाँ पर एक गुफा स्थापित  जहां पर नंदिकेश्वर गुफा स्थापित है !

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यहाँ का प्राकतिक सुंदरता देखते ही बनती है क्यूंकि यहाँ पर प्रक्रति और पुरुष का अदभुत संगम देखने को मिलता है ! यह बंकर के बसा हुआ है और पर्यटकों  के लिए यह स्थान एक पिकनिक स्पॉट भी  है ! माता ने यहां पर दो असुरों चण्ड मुंड का संहार किया था जिस कारण माँ का यह स्वरुप चामुंडा के नाम से जाना जाता है !


लाखों बर्षों पहले धरती पर दो असुरों शुम्भ निशुम्भ का राज था ! और उन्हें ब्रम्ह देव से वरदान प्राप्त था की उन्हें कोई भी नर उन्हें समाप्त नहीं कर सकता ! तो इसी वरदान का फायदा उठा कर यह दोनों दैत्यों ने तीनो लोको को जीत लिया था ! और अब उनका अगला कदम कदम कैलाश था जिसे जितने के लिए उन दैत्यों ने अपने दो सेनापती चण्ड मुंड को कैलाश पर अधिकार के लिए भेजा !

वहां पर उनकी भेंट कैलाशस्वामिनी अर्थात माता पार्वती से हुई ! माता देखकर वो आश्चर्यचकित हो गए अर्थात माता सुंदरता को देखकर मोहित गए और जिसकी सूचना देने के लिए वो अपने राजा शुम्भ निशुंभ के पास पहुंचे और माता की सुंदरता का वर्णन किया ! जिस कारण वो माता के ऊपर अपनी कुद्रिष्टि डालता है और माता को अपने पास लाने के लिए एक दैत्य धूम्रलोचन को भेजता है जब को माता के पास आता है तो माता की हुंकार से वो दूर जा गिरता है !

परन्तु माता अपनी शक्ति से अंजान होती है जिस कारण वो समझ नहीं पाती की यह कैसे हुआ ! दोबारा माता को लाने के लिए चण्ड मुंड को भेजता है ! और वो माता लक्ष्मी जी को ले जाने लगते है तभी माता पार्वती अत्यंत क्रोधित हो जाती है

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और आसमान में जोर से गर्जना होने लगती है तभी माँ पार्वती महाकाली अवतार लेती है और अत्यंत क्रोधित हो जाती है दैत्यों की सारी सेना का संहार कर देती है और चण्ड मुंड का भी संहार कर देती है चण्ड मुंड का वध के कारण ही माँ का नाम चंडिका अर्थात चामुंडा पड़ा !

इस मंदिर का प्रमाण आज से 700 बर्ष पहले हुआ था अर्थात यह मंदिर 700 बर्ष पुराना है !

 

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