दिल्ली के बारे में जरूरी जानकारी पढ़ें

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भारत की राजधानी के बारे में जरूरी जानकारी

दिल्ली भारत देश की राजधानी और यह एक केंद्र शासित प्रदेश है ! और इस राज्य को देश का दिल भी कहा जाता है ! दिल्ली के अन्दर 11 जिले है और यह केंद्र के रूप में कार्य करती है ! इतिहास में अंग्रेजो के टाइम में सनं 1911 तक भारत की राजधानी कोलकाता थी बाद में इसे राजधानी घोषित कर दिया गया ! दिल्ली 1,484 km² में फैला हुआ है ! इस इस राज्य की वर्तमान औसत जनसँख्या 1.9 cr पहुँच गयी है !

दिल्ली का नाम दिल्ली कैसे पड़ा

दिल्ली का पुराना नाम इंदरप्रस्थ भी है अर्थात इतिहास में दिल्ली को पांडवो की वसाई नगरी भी कहा जाता है ! जो इतिहास में पांडवो की राजधानी थी ! 50 ईसा पूर्व में मौर्य राजा थे जिनका नाम धिल्लु था माना जाता है कि इन्हीं के नाम पर दिल्ली का नाम दिल्ली पड़ा !

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कुछ इतिहासकारो का कहना है कि तोमरवंश के राजा धव ने राज्य का नाम ढिल्ली रख दिया था क्योंकि किले के अन्दर एक लोहे का खम्भा ढिला था जिसे बदला गया था ! बाद में यह ढीली शब्द ही दिल्ली बना ! तोमरवंश द्धारा एक  तथ्य है कि तोमरवंश के दौरान जो सिक्के बनाये जाते थे उन्हें देल्हीवाल के नाम से जाना जाता था उसी कारण दिल्ली का नाम दिल्ली पड़ा ! वही कुछ लोगो का मानना है की हज़ार डेढ़ हज़ार पहले इतिहास में दिल्ली को हिन्दुस्तान की देहलीज माना जाता था ! देहलीज का अपभ्रंश दिल्ली हो गया ! मौर्य राजा ढीलू से जुडी एक कहानी भी है ! कहा जाता है की उनके सिहांसन के आगे एक कील ठोकी गयी थी ! और कहा गया की यर्ह कील पाताल तक पहुँच गयी ! ज्योतिषो ने भविष्य वाणी  कील जब तक रहेगी तब तक साम्राज्य कायम रहेगा कील काफी छोटी थी ! तो राजा ने उसे निकलवाकर दूसरी कील ठोक दी पर वो कील डिल्ली रह गयी ! तभी से कहाबत बानी “किलि तो ढीली भई” और कहावत मशहूर होती गयी ! और ढीली और ढीलू मिलाकर दिल्ली बन गया !महाराज पृथ्वीराज के दरवारी कवी चंद्रवरदाई की हिंदी रचना पृथ्वीराज रासों में तोमर राजा अनंगपाल को दिल्ली का संस्थापक बताया गया है ! ऐसा माना जाता है कि  उन्होंने ही लाल कोट का निर्माण करवाया था ! और महारैली के गुप्त सतम्भ को दिल्ली लाया ! तथा महाराज पृथ्वीराज चौहान का दिल्ली का आखिरी हिन्दू सम्राट माना जाता है  ! 1206 ईस्वी के बाद दिल्ली सल्तनत की राजधानी बनी !

दिल्ली का इतिहास

इतिहास में दिल्ली हमेशा से ही हिन्दुस्तान का राजनितिक केंद्र रहा है ! यही कारण रहा है की दिल्ली के लिए हमेशा से ही हर किसी ने राज करना चाहा ! और दिल्ली के ऊपर बहुत से शाशकों ने शासन किया है ! पर कोई भी शाषक ज्यादा समय तक शासन नहीं कर सका पर एक राजपूत शाषक ही थे जिन्होंने दिल्ली पे ज्यादा शासन किया ! राजपूतों ने ही दिल्ली के ऊपर 500 से 600 साल तक शासन किया ! 736 ईस्वी से 1180 ईस्वी तक दिल्ली में तोमर राजाओ ने राज किया था ! लाल कोट फोर्ट को राजा अनंगपाल तोमर ने 736 ईसा में बनाया था ! अनंगपाल की ,मृत्यु के दौरान दिल्ली का शासन अजमेर में राज कर रहे चौहानो के पास चला गया ! जिनमें पृथ्वीराज चौहान ने  1180-1192 ईसा तक शासन किया ! और पृथ्वीराज चौहान बने दिल्ली के आखिरी हिन्दू शासक ! मोहम्मद गौरी ने जीत हासिल करके अपने गुलाम के हवाले कर दिया ! और इन शासको ने 1292-1289 ईसा तक शासन किया ! इस दौरान भी रजिया सुल्ताना भी 4 साल दिल्ली की सुल्तान बनी ! और 1290 में जलालुद्दीन खिलजी के जीत कर अपने कब्जे में कर लिया ! उसके दौरान अलाउद्दीन खिलजी ने जलालुद्दीन खिलजी की हत्या कर शासन कर लिया ! खिलजी शासन ने 1290-1320 ईसा तक शासन किया ! उसके दौरान तुगलक शासकों ने 1320 में खिलजी शासकों को हराकर अपना शासन स्थापित किया ! 1320-1413 ईसा तक तुगलकों ने शासन किया ! पर तुगलक मंगोलो को नहीं रोक पाए ! तैमूरलक मंगोलो का शासक था जिसने तुगलकों को हराकर और पुरे भारत में लूटपाट करके सैय्यद शासको के ख़िज़्र शाह को दिल्ली का सिहांसन को सौंप गए ! सैय्यद शासकों ने 1414-1451 ईसा तक शासन किया ! सैय्यद शासकों के आखिरी सुल्तान आलम शाह ने लोदी शासकों को खुद से सिहांसन सौंप दिया ! उसके दौरान बाबर ने लोदी शासकों के आख़िरी सुल्तान इब्राहिम लोदी को हराकर मुग़ल शासन कायम किया ! पर मुग़ल सिर्फ 14 साल तक ही दिल्ली पर शासन कर पाए ! शेरशाह सूरी जो सूरी शासकों में से था ! उसने हुमायुँ को हराकर सूरी शासन कायम किया ! और शेरशाह सूरी ने ही रुपया का निर्माण किया था ! पर अचानक ही पांच साल बाद शेरशाह की मृत्यु हो गयी जिसका फायदा उठाकर हुमायूँ ने हमला कर दिया और एक बार फिर मुग़ल शासको ने दिल्ली पर हुकूमत का झंडा लहराया ! और अगले 300 साल तक मुगलो ने यहाँ शासन किया ! उसके दौरान ब्रिटिश राज पूरा देश में आया ! ब्रिटिश का भारत में आने का कारण उस दौरान भारतीयों ने ध्यान नहीं दिया और आपसी झगडे में अड़े रहे जिसका फायदा ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने उठाया ! और भारत में एकता एकजुट हुयी जिसका नतीजे के कारण 15 अगस्त  1947 में हिन्दुस्तान को आज़ादी मिली ! और 1952 में चौधरी ब्रह्म प्रकाश बने दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री !

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