बैजनाथ शहर के बारे में जानकारी

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Baijnath ke baare jruri baate

बैजनाथ जिला कांगड़ा(हिमाचल प्रदेश) में स्थित एक सुंदर स्थान है इस स्थान को शिवनगरी के नाम से जाना जाता है। बैजनाथ मंडी पठानकोट हाइवे के मध्य एक छोटा सा शहर है और बहुत ही सुंदर शहर है इस शहर में एक भव्य शिव मंदिर है जहा पर बैद्यनाथ धाम के नाम से प्रसिद्ध है जिस कारण इस शहर का नाम बैजनाथ पड़ा और कहा जाता है इस शहर में साक्षात शिव भगवान विराजमान है यह शहर पालमपुर से १६km की दूरी पर स्थित है यह जगह मकर सक्रांति, महाशिवरात्रि, श्रवण माह के लिए जाना जाता है यह जगह शिव भगत के नाम के लिए भी प्रसिद्ध है क्योंकि इस स्थान पर भोलेनाथ के सबसे प्रिय भगत रावण के लिये ज्यादा प्रसिद्ध है क्योंकि यही वो स्थान है जहाँ पर रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिये तप किया था यहाँ पे रावण के अस्तित्व की कुछ झलक भी देखने को मिलती है यहाँ एक छोटा सा मंदिर है जहाँ पर रावण के पैर के निशान मिलते है और यहाँ पर जहाँ देशभर में दशहरे के दिन रावण का पुतला जलाया जाता है यहां पर कभी भी रावण का पुतला नही जलाया जाता और इस शहर में कहीं भी सोने चांदी की दुकान नही है यहाँ पे साथ मे एक स्थान है घिरथोलि जहाँ पे घिरथ नाम की जाती के लोग ज्यादा पाए जाते है जिस कारण इस गाँव का नाम घिरथोलि पड़ा और यह भी कहा जाता है कि यहाँ पे बसने वाले सभी घिरथ रावण से संबंध रखते है यानी यह सभी रावण के वंशज है जब रावण यहाँ अपनी सेना को लेके आया था तब उसकी सेना की आधी टुकड़ी यही बस गयी इसलिए यह सभी लोग रावण से संबंधित है ।बैजनाथ छोटा शहर तो है लेकिन इस शहर में बहुत बड़े बड़े राज दफन है तो आइए जानते है इस शहर की कुछ रोचक बातें।

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बैजनाथ का इतिहास

बैजनाथ जिला काँगड़ा हिमाचल प्रदेश में स्थित एक छोटा सा शहर है यह शहर बैजनाथ शिव नगरी के नाम से प्रसिद्ध है बैजनाथ का पुराना नाम कीरग्राम था और यह नगर शिव भगत रावण से संबंधित भी है लंकापति रावण भगवन शिव का परम भागत था और वो भगवन शिव को लंका ले जाना चाहता था और यही बात  सभी देवताओ के लिए चिंता का विषय बानी हुयी थी रावण भगवन शिवजी को अपने साथ ले जाने के लिए अपने साथ एक सेना की टुकड़ी को लेके आया था और इस स्थान पर पहुँच कर उसने भगवन शिवा को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या आरम्भ कर दी और इसी दौरान उसने अपने सर को १० बार काटा और जब ११वी बबर काटने लगा तो भगवन शिव उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर प्रकट हुए जब भगवान को रावण ने अपनी आंखो के समक्ष पाया तो अपने आप को रोक नहीं सका और शिवजी के चरणों में जा गिरा और जब भोलेनाथ ने उसको वर मांगने के लिए पूछा तो उसने अपनी बात सामने रखी  कि वो शिवजी को अपने साथ ले जाना चाहता है और उनकी सेवा करना चाहता है और यह वरदान सभी देवताओ के लिए एक चिंता का विषय बन गयी वो किसी भी तरह शिवलिंग को रावण को लंका ले जाने से रोकना चाहते थे और जिस स्थान पर शिवजी प्रकट हुए वहाँ पर एक शिवलिंग निर्माण हुआ जिस शिवलिंग का नाम चिताभूम बैद्यनाथ पड़ा जो आगे बैजनाथ के नाम से प्रसिद्ध हुआ जो जिला काँगड़ा का भव्य मंदिर है रावण ने अपनी सेना की टुकड़ी यही पे छोड़ दी शिवजी के पूजन के लिए जो आज भी यही पे है और इसी शिवलिंग से उत्पन्न हुआ एक शिवलिंग जिसका नाम झारखंड देवघर शिवलिंग जो बिहार में स्थित है यही वो शिवलिंग है जो रावण अपने साथ लंका ले जाना चाहता था लेकिन देवताओ की योजना क कारण  उसने उसे वही रख दिया और यह आज भी बैद्यनाथ के नाम से प्रसिद्ध है जो बिहार में स्थित है और जिस स्थान पर रावण ने तपस्या की थी वो स्थान बैजनाथ बना और आज भी इस स्थान पर रावण के आने के प्रतीक मिलते है आज भी यहाँ पर एक छोटे से मंदिर में रावण के पैरों के निशान स्थित है ! और बैजनाथ मंदिर का निर्माण द्धापर युग में पांडवो ने अज्ञातवास के दौरान किया और शेष निर्माण १२०४ ई. में हुआ इसका निर्माण दो क्षेत्रीय व्यापारियों अहुक और मन्युक द्धारा किया गया!

महत्वपूर्ण तथ्य

  • जहाँ एक ओर दशहरा पर्व पूरे देश मे हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है और रावण मेघनाथ और कुम्भकर्ण के पुतले को जलाकर लंका पर भगवान राम की जीत को दर्शाया जाता हैं वही यहाँ इस स्थान पर रावण के पुतले को न जलाया जाता है और न ही राम लीला की जाती है ऐसा नही है कि यहाँ पर कभी दशहरा नही मनाया गया एक बार यहाँ पे किसी ने ऐसा किया तो रावण को जलाने वाला अगले दशहरे तक जीवित नही रह पाता है और उसके साथ साथ उसके परिवार को भी इसकी कीमत चुकानी पड़ती है यही कारण है कि यहाँ रावण दहन नही किया जाता है और न ही पूरे क्षेत्र में कोई सुनार की दुकान है और यहाँ के स्थानीय लोग भी इस बात का सम्मान करते हैं जो भी रावण दहन में शामिल होने की इच्छा रखता है वो आस पास के स्थानों में जाकर मना लेते है

भौगोलिक स्थिति

  • यह मंदिर पालमपुर शहर से १६ कि. मी. की दूरी पर स्थित है और यह स्थान पठानकोट से मंडी राष्ट्रीय हाइवे nh/154 के मध्य आता है!
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