राजपूत पृथ्वीराज चौहान के जीवन की जानकारी

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Biography of Prithviraaj Chauhan

पृथ्वीराज चौहान बहुत ही साहसी और ज्ञानी राजा थे! जो राजपूत वंश से सम्बन्ध रखते थे! और बात की जाये राजपूतों  की तो राजपूतों का इतिहास बहुत ही गौरवशाली रहा है! राजपूत वंश ने 7th Century  से लेकर 12th century तक पुरे उत्तर भारत में 500 साल तक राज किया था! राजपूत वंश आपस में लड़ते रहते थे लेकिन जब भी कोई बाहरी युद्ध होता तो यह एकजुट हो जाते थे! इसी तरह पृथ्वीराज ने भी बहुत सी लड़ाईयां लड़ी और जीती जिस कारण उनके दुश्मन भी बहुत बढ़ गए थे! पृथ्वीराज चौहान के सबसे बड़े दुश्मन राजा जयचंद थे जिनकी बेटी संयोंगिता ने पृथ्वीराज से भागकर शादी की थी जो बात राजा जयचंद के साथ दुश्मनी का सबसे बड़ा कारण था! पृथ्वीराज के जीवन पर आधारित “पृथ्वीराज रासों” जो पृथ्वीराज के दरबारीक कवि चंदबरदाई ने लिखी थी!

पृथ्वीराज के जीवन की मुख्या बातें

पृथ्वीराज चौहान का जन्म चाहमाना के राजा सोमेश्वर और रानी कपुरादेवी के यहाँ 1166 के आस पास हुआ था! पृथ्वीराज चौहान बहुत ही बुद्धिमान व्यक्ति थे! इनको भुत सी भाषाओँ का ज्ञान था यह नहुत सी भाषाएँ बोल लेते थे! 1177 में इनके पिताजी का देहांत हो गया था उस समय उनकी उम्र मात्र 11वर्ष थी! इतनी छोटी सी उम्र में इन्होंने तख़्त संभाला था! यह उस समय छोटी उम्र के थे जिस कारण हर कार्य उनकी माता जी देखती थी! जैसे-जैसे यह आगे बड़े यह हर कार्य जल्दी सीख गए थे! जब यह 14 वर्ष के हुए थे सत्ता पूरी तरह उनके हाथो में आ चुकी थी जो अपने आप में बहुत बड़ी बात थी! उस दौरान तख़्त हासिल करने के लिए बहुत से राजपूत राजाओं ने इनका विरोध किया था! उनमे से गुडापुरा के राजा नागार्जुन भी एक थे जिनको पृथ्वीराज ने हराया था! उसके पश्चात् 1182 में भदनाकास को भी हराया! 1182-83 में Chandelas of Jejakabhukti को भी हराया! उस दौरान इन्होंने बहुत से युद्ध जीते! 1187 में  Chaulukyas of Gujraat  को जीता! फिर Paramaras of Abu  और Gahadavalas of kannauj  को जीता! इनमे से सबसे बड़ा युद्ध Gahadavalas का था! यह युद्ध राजा जयचंद के साथ था! जिनकी पुत्री का नाम संयोंगिता था जो पृथ्वीराज की पत्नी बनी! पृथ्वीराज ने कन्नौज को अपने अधीन कर लिया था वहां पर एक चित्रकार ने पृथ्वीराज का एक चित्र बनाया! जिस चित्र की प्रसंशा पुरे राज्य में होने लगी और सभी स्त्रियाँ उस चित्र पर मोहित हो गयी क्योंकि प्रिथ्विराज बहुत ही सुंदर थे और जब जयचंद की पुत्री संयोंगिता ने उनका यह चित्र देखा वो भी मन ही मन पृथ्वीराज पे मोहित हो गयी और पृथ्वीराज से शादी का विचार किया! राजा जयचंद को पृथ्वीराज ने युद्ध में हराया था तो उनको अपने अधीन कर लिया था! परन्तु जब राजा जयचंद ने अपनी पुत्री का स्वयंवर रखा उस दौरान राजा पृथ्वीराज स्वयंवर से संयोंगिता को भागकर ले गए थे! हालाँकि यह सब राजा की सहमती से ही हुआ था! जिस कारण राजा जयचंद और पृथ्वीराज के मध्य दुश्मनी और भी गहरी हो गयी थी! परन्तु उसके बाद युद्ध के लिए पृथ्वीराज ने राजा जयचंद का साथ भी दिया था! इधर पृथ्वीराज चौहान उतरी भारत में राज कर रहे थे! और अफगानिस्तान में मुहम्मद गोरी का उदय हुआ! 1175 में मुहम्मद गोरी ने मुल्तान में युद्ध लड़ा इसने कुछ इलाके जीत लिए लेकिन इतनी कामयाबी इसको नहीं मिली! 1178 में जब इसने लड़ाई लड़ी तब ये हारा क्योंकि राजपूतों को हराना बहुत मुश्किल था! परन्तु इसने पंजाब के कुछ इलाके और उतरी भारत के कुछ इलाके जीत लिए थे! लेकिन बड़ी लड़ाई 1190-91  के बीच हुई थी जो तराइन की पहली लड़ाई थी! इस लड़ाई ने भारत के इतिहास को बदल के रख दिया था! इस युद्ध में मुहम्मद गोरी को पृथ्वीराज चौहान की ताकत का पता लग गया था! यहाँ पर पृथ्वीराज चौहान को हराना अत्यंत मुशिकल था! मुहम्मद गोरी पूरी सेना लेके आया था लेकिन यह युद्ध पृथ्वीराज से जीत पाना मुशिकल था! यहाँ पर पृथ्वीराज चौहान की सबसे बड़ी गलती जो इतिहास की सबसे बड़ी गलती थी कि उन्होंने मुहम्मद गोरी को जिन्दा छोड़ना था! वापिस जाने के बाद मुहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज को धमकी भरा ख़त भेजा और सुलह के लिए कहा! इस पर राजपूत पृथ्वीराज ने कहा की हार की वजह से पागल हो गया है परन्तु अगर इस बार भारत आया तो जिन्दा वापिस नहीं जायेगा! परन्तु अगली बार के लिए मुहम्मद गोरी बहुत ही चालाक हो गया था! वो इस बार 1 लाख 60 सैनिकों की विशाल सेना के साथ भारत आया! और यह युद्ध 1192 में हुआ था दोनों तरफ बहुत विशाल सेनाए थी! अपनी सेना को मुहम्मद गोरी ने 5 टुकड़ी में बांटा था! परन्तु इस बार भी पृथ्वीराज चौहान ने पांचो टुकड़ियों को हरा दिया! जब मुहम्मद गोरी को लगा की वो हारने वाला है तब उसने अपनी सेना को वपिस बुला लिया क्योंकि इस बार वो पूरी तयारी करके आया था उसने युद्ध के सरे नियमो को तोड़ दिया था युद्ध का नियम सुबह से शाम को लेके युद्ध लड़ा जाता था मुहम्मद गोरी ने रात के समय पृथ्वीराज के सैनिकों के ऊपर हमला किया था परन्तु राजपूतों ने इसका करारा जबाब दिया था! मुहम्मद गोरी ने अपनी सेना की टुकड़ी को पीछे छिपा के रखा था जब उसकी सेना भागने लगी उस दौरान पृथ्वीराज की सेना भी उस सेना के पीछे पड़ी परन्तु बड़ी ही चालाकी से मुहम्मद गोरी ने राजपूतों की सेना को घेर लिया और इस युद्ध में पृथ्वीराज को हार का सामना करना पड़ा इस लड़ाई में सभी राजपूत वंश उनके साथ थे परन्तु जयचंद ने इस लड़ाई में हिस्सा नहीं लिया था! इस युद्ध के बाद भारत में मुस्लिमों का राज हो गया जो अगले 500 साल तक रहा!

पृथ्वीराज चौहान की मृत्यु कैसे हुई

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पृथ्वीराज की मृत्यु की बात की जाये तो यह कैसे हुई यह अभी तक किसी को मणि मालूम परन्तु इस बारे में सभी ने अलग अलग रूप से बताया है! “पृथ्वीराज रासों” के अनुसार युद्ध के दौरान मुहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज की आँखों में वार किया! जिससे उनकी आँखों की दृष्टि चली गयी तभी चंदबरदाई ने मुहम्मद गोरी से कहा की इन्हें बहुत अच्छी तीरंदाजी आती है! तो मुहम्मद गोरी यह देखने के लिए ऊँचे स्थान पे जाकर बैठ गया और चंदबरदाई ने कविता के जरिये पृथ्वीराज को यह बताया की मुहम्मद गोरी कहाँ बैठा है और पृथ्वीराज का निशाना बिलकुल सही जगह लगा और इसके बाद पृथ्वीराज चौहान ने खुदखुशी कर ली थी!

लेकिन कुछ में कहा गया है कि पृथ्वीराज युद्ध में मारे गए तो कुछ के अनुसार इनको कैद कर लिया गया था! लेकिन अभी तक यह नहीं मालूम हुआ की इनकी मृत्यु कैसे हुई!

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