कुल्लू के बारे में जरूरी बातेँ जो जरुर जाननी चाहिए

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कुल्लू के बारे में जरूरी बातेँ जो जरुर जाननी चाहिए

हिमाचल के कुल्लू जिले के बारे में जानकारी

कुल्लू हिमाचल में स्थित बहुत ही सुंदर जिला है यह चारो ओर सुन्दरता से सजा हुआ जिला है कुल्लू दुनिया भर के पर्यटकों का पर्यटन स्थान है! गर्मी के दिनों में यहाँ बहुत से पर्यटक घुमने आते है! इस जिले की खूबसूरती दुनिया भर के पर्यटकों को अपनी ओर खींचती है! कुल्लू घाटी को देवताओं की घाटी भी कहा जाता है! कुल्लू विज नदी के किनारे बसा हुआ बहुत ही सुंदर और हरा भरा स्थान है यहाँ इस स्थान पर मनाये जाने वाला दशहरा उत्सव दुनिया भर में प्रसिद्ध है! यहाँ पर 17वीं शताब्दी में बना रघुनाथजी मंदिर है जो हिन्दुओं के लिए एक प्रमुख तीर्थ स्थान है! कुल्लू घाटी को सिल्वर वैली के नाम से भी जाना जाता है यहाँ पर धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के आलावा एडवेंचर स्पोर्ट्स भी बहुत प्रसिद्ध है!

कुल्लू के पर्यटन स्थल

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले की बात की जाये तो कुल्लू में बहुत से पर्यटन स्थल घुमने के लिए है! खास यहाँ पर गर्मियों में बहुत से लोग अपनी छुटियाँ मानाने यहाँ पर आते है क्योंकि यहाँ के मौसम की बात की जाये तो बहुत ही ठंडा रहता है तो बहुत से पर्यटक ठंडे मौसम का आनंद लेने के लिए इस स्थान पर आते है! यहाँ पर सेब के बगान, मंदिर और यहाँ का दशहरा यहाँ के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है! यहाँ पर स्थित रघुनाथजी मंदिर, बिजली महादेव मंदिर, कुल्लू का दशहरा और वॉटर और एडवेंचर स्‍पोर्ट बहुत प्रसिद्ध है!

कुल्लू का दशहरे की बिशेषता

हिमाचल प्रदेश कुल्लू का दशहरा पुरे देश में बहुत प्रसिद्ध है! यहाँ पर दशहरा उत्सव की तैयारी एक सप्ताह पहले ही शुरू हो जाती है! और यहाँ का दशहरा एक महीने तक चला रहता है! कुल्लू में दशहरे के दौरान यहाँ के ग्रामीण देवता की धूम धाम से जुलूस निकल करके पूजन किया जाता है! और देवताओं की मूर्तियों को बहुत ही आकर्षित पालकी में सुंदर दंग से सजाया जाता है!  स्त्रियाँ और पुरुष सभी सुंदर वस्त्रों से सज्जित होकर तुरही, बिगुल, ढोल, नगाड़े, बाँसुरी आदि-आदि जिसके पास जो वाद्य होता है, उसे लेकर बाहर निकलते हैं। दशमी के दिन जहाँ पूरे देश में दशहरा ख़त्म हो जाता है उस दौरान यहाँ दशहरे को शुरू किया जाता है! यहाँ पे स्थित मुख्य देवता रघुनाथ जी की पूजा करके जुलूस में नृत्य किए जाते है! इस प्रकार जुलूस बनाकर नगर के चारों ओर परिक्रमा की जाती है! और रघुनाथजी की वंदना के साथ दशहरे का आरम्भ किया जाता है! जहाँ देश के बाकी हिस्‍सों में दशहरे के दिन रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया जाता है! वैसे यहाँ पर नहीं यहाँ पर इस त्यौहार के दौरान भगवान् रघुनाथजी की रथ यात्रा निकाली जाती है! यहाँ के लोगों का मानना है कि यहाँ इस अवसर में करीब 1000 देवी-देवता शामिल होते है!

क्या है जिला कुल्लू का इतिहास

हिमाचल प्रदेश में कुल्लू का जिले के रूप में गठन 1963में हुआ था! कुल्लू का कुल क्षेत्रफल 5503 वर्ग किलोमीटर है ! कुल्लू के उत्तर  में लाहौल स्पीति, पूर्व में किन्नौर, दक्षिण में शिमला, पश्चिम और दक्षिण में मंडी और उत्तर पश्चिम में काँगड़ा जिला स्थित है !

कुल्लू का पौराणिक ग्रंथों में ‘कुल्लुत देश, के नाम से वर्णन मिलता है | रामायण,विष्णुपुराण,महाभारत,मार्कडेंय पुराण, वृहस्तसंहिता पर कल्हण की राजतरंगिणी में ‘कुल्लुत’ का वर्णन मिलता है | कुल्लू घाटी को कुलंतपीठ भी कहा गया है क्यूंकि इसे रहने योग्य संसार कहा गया है |  कुल्लू रियासत की स्थापना विहंगमनीपाल ने हरिद्वार से आकर की थी | विहंगमनीपाल के पूर्वज इलाहाबाद से अल्मोड़ा और हरिद्वार आकर बस गए| विहंगमनीपाल स्थानीय जागीरदारों से पराजित होकर प्रारम्भ में जगतसुख के चपाईराम के घर रहने लगे | भगवती हिडिम्बा देवी के आशीर्वाद से विहंगमनीपाल ने रियासत की पहली राजधानी जगतसुख स्थापित की | विहंगमनीपाल के पुत्र पछ्पाल ने ‘गजन’ और ‘बेवला’ के राजा को हराया!

इस लेख के बारे में भी जरुर पढ़ें: काँगड़ा शहर के बारे में जरूरी जानकारी

महाभारत काल के दौरान हिमाचल की कुल्लू रियासत की कुल देवी हिडिम्बा ने भीम से विवाह किया था ! घटोतकच भीम और हिडिम्बा का पुत्र था!  चीनी यात्री हेनसांग ने 635 ई० में कुल्लू रियासत की यात्रा की! उन्होंने कुल्लू रियासत की परिधि 800 किलोमीटर बताई जो जालंधर से 187 किलोमीटर दूर स्थित था! भगवान बुद्ध की याद में अशोक ने कुल्लू में बौद्ध स्तूप बनवाया! नग्गर के राजा करमचंद को युद्ध में हराकर विसूदपाल ने कुल्लू की राजधानी जगतसुख से नग्गर स्थानांतरित की ! रुद्रपाल के शासनकाल में स्पीति के राजा राजेंद्र सेन ने कुल्लू पर आक्रमण करके उसे नरजना देने के लिए विवश किया!  प्रसिद्धपाल ने स्पीति के राजा छतसेन से कुल्लू और चम्बा के राजा से लाहौल को आज़ाद करवाया था! दतेश्वर पाल के समय चम्बा के राजा मेरुवर्मन (680-700 ई०) ने कुल्लू पर आक्रमण कर दतेश्वर पाल को हराया और वह इस युद्ध में मारा गया! दतेश्वर पाल ‘पालवंश’ का 31वां राजा था! जारेशवरपाल ने बुशहर रियासत की सहायता से कुल्लू और चम्बा से मुक्त करवाया ! कुल्लू के 43वें राजा भूपपाल सुकेत राज्य के संस्थापक वीरसेन के समकालीन थे! वीरसेन ने सिराज में भूपपाल को हराकर उसे बंदी बनाया! पाल वंश के 72वें राजा  उर्दान पालमें जगतसुख में संध्या देवी का मंदिर बनवाया! कैलाश पाल (1428-1450 ई०) कुल्लू का अंतिम राजा था! कैलाश पाल के बाद के 50 वर्षों के अधिकतर समय में कुल्लू सुकेत रियासत के अधीन रहा! वर्ष 1500 ई०  में सिद्ध सिंह बदानी वंश की स्थापना की! उन्होंने जगतसुख को अपनी राजधानी बनाया!  बहादुर सिंह सुकेत के राजा अर्जुन सेन का समकालीन था! बहादुर सिंह ने बजीरी रूपी को कुल्लू राज्य का भाग बनाया! बहादुर सिंह ने मकरसा में अपने लिए महल बनवाया! मकरसा की स्थापना महाभारत के विदुर के पुत्र मकस ने की थी ! राज्य की राजधानी उस समय नग्गर थी! बहादुर सिंह ने अपने पुत्र प्रताप सिंह का विवाह चम्बा के राजा गणेश वर्मन की बेटी से करवाया! बहादुर सिंह के बाद प्रताप सिंह (1559 -1575 ई०), परतब सिंह (1575 -1608 ई०), पृथ्वी सिंह (1608 -1635 ई०) और कल्याण सिंह (1635-1637 ई०) मुगलों के अधीन रहकर कुल्लू पर शासन कर रहे थे! जगत सिंह कुल्लू रियासत का सबसे शक्तिशाली  राजा था! जगत सिंह ने लग बजीरी और बहरी सिराज पर कब्जा किया! उन्होंने डुग्गिलग के जोगचंद और सुल्तानपुर के सुल्तानचन्द (सुल्तानपुर के संस्थापक )को (1650-55 ई०)के बीच पराजित कर ‘लग’ बजीरी पर कब्जा किया! औरंगजेब उन्हें ‘कुल्लू का राजा’ कहते थे!  कुल्लू के राजा जगत सिंह ने 1640 ई० में दाराशिकोह के विरुद्ध विद्रोह किया तथा 1657 ई० में उसके फरमान को मानने से मना कर दिया था!  कुल्लू के राजा मानसिंह ने मंडी पर आक्रमण क्र गम्मा (द्रंग) नमक की खानों पर 1700 ई० में कब्जा जमाया! उन्होंने 1688 ई० में वीर भंगाल क्षेत्र पर नियंत्रण किया! उन्होंने लाहौल – स्पीति को अपने अधीन कर तिब्बत की सीमा लिंगटी नदी के साथ निर्धारित की! राजा मानसिंह ने शंगरी और बुशहर रियासत के पंडरा ब्यास क्षेत्र को बिस अपने अधीन किया! उनके शासन में कुल्लू रियासत का क्षेत्रफल 10,000 वर्ग मील हो गया! राजा अजित सिंह के समय 1820 ई० में विलियम मूरक्राफ्ट ने कुल्लू की यात्रा की! कुल्लू प्रवास पर आने वाले वह पहले यूरोपीय यात्री थे! राजा अजित सिंह को सिक्ख सम्राट शेरसिंह ने कुल्लू रियासत से खदेड़ दिया (1840  ई० में)! ब्रिटिश संरक्षण के अधीन सांगरी रियासत में शरण लेने के बाद 1841 ई० में अजित सिंह की मृत्यु हो गयी! कुल्लू रियासत 1840 ई० से 1846 ई० तक सिक्खो  के अधीन रहा! प्रथम सिक्ख युद्ध के बाद 9 मार्च, 1846ई० को कुल्लू रियासत अंग्रजों के अधीन आ गया! लाहौल स्पीति को 9 मार्च,1846 ई० को कुल्लू में मिलाया गया!  स्पीति को लद्दाख से कुल्लू को मिलाया गया! कुल्लू को 1846 ई० में काँगड़ा का उपमंडल बनाकर शामिल किया गया ! कुल्लू उपमंडल से अलग होकर लाहौल स्पीति जिले का गठन 30 जून, 1960 ई० को हुआ ! कुल्लू जिले के पहले उपायुक्त गुरुचरण  सिंह थे! कुल्लू जिले का 1 नवंबर, 1966 ई० को पंजाब से हिमाचल प्रदेश में विलय हो गया!

कुल्लू में प्रसिद्ध स्थान

Great Himalayan National Park: A UNESCO Heritage Site

Raghunath Temple: Feel Blessed

Bijli Mahadev Temple: Both Sacred And Beautiful

Pandoh Dam: As Beautiful As It Gets

Manikaran: For The Hot Springs

Friendship Peak: The Name Is Enough

Chandrakhani Pass: For Its Scenic Beauty

Bhrigu Lake: One Of The Most Famous Indian Lakes

Bhuntar: Unexplored But Gorgeous

Naggar: A Quaint Little Town

Jagannathi Devi Temple: Both Historical And Religious

Gauri Shankar Temple: One Of The Oldest Indian Temples

Hanogi Mata Temple: For Its Picturesque Beauty

Inderkilla National Park: Interact With Flora And Fauna

Kheerganga National Park: Bewitchingly Beautiful

Parvati Valley Trek: The Real Aventure

Malana: Boost Up The Thirst For Adventure

Rafting in Manali: Gear Up Your Passion for Travelling

Pin Bhaba Pass Trek: Experience The Toughest Trek

Khirganga National Park:  Have A Good Time While Travelling

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