लंका के राजा रावण के बारे में यह बाते सबको जाननी चाहिए

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रामायण के अनुसार लंका के राजा रावण के बारे में यह बाते सबको जाननी चाहिए

रामायण में रावण के तथ्य(Ramayana Facts of Raavana)

देश और दुनिया भर में कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन की स्थिति है! वही दूरदर्शन के चैनल में रामानंद सागर कृत रामायण का प्रसारण किया जा रहा है! और जिस कारण दूरदर्शन इस समय सबसे ज्यादा TRP वाला चैनल बन गया है! वही देखने वाले दर्शकों के मन में कई सवाल आ रहे तो जानते है क्या है यह सवाल और इनके जबाब

 रावण की राजगद्दी के नीचे मूर्ति का रहस्य

जहाँ रामायण का प्रसारण किया जा रहा है वही कुछ दर्शको के मन में यह सवाल है की रावण की राजगद्दी की निचे किसकी मूर्ति है! तो यह मूर्ति किसी और की नहीं न्याय के देवता शनि देव की है जिन्हें रावण ने बंदी बनाया हुआ था! रावण ने शनि लोक में चढाई कर शनि देव की शक्तियों को कीलित कर दिया था! और उन्हें अपने सिंहासन के निचे रखा था! जब हनुमान जी लंका गए थे तब हनुमान जी नजर शनिदेव के उपर गयी! और शनिदेव के कोप के कारण ही रावण की लंका जल उठी और राम रावण युद्ध में रावण वंश सहित मारा और बाद में हनुमान जी के द्वारा शनिदेव को आज़ाद कर दिया गया था!

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राज दरबार में रावण को श्री हनुमान जी का संदेश

राम जी की आज्ञा के अनुसार हनुमान जी माता सीता को दुंडने लंका जाते है!  और वहां के अशोक वाटिका में माता सीता से मिलते है भूख लगने के कारण अशोक वाटिका से फल खाने लगते है! उसी दौरान वहां पर अक्षय कुमार आ जाता है और हनुमान जी उसको मार गिरते है और मेघनाथ द्वारा ब्रम्हअस्त्र का प्रयोग किया जाने पर खुद को बंदी बना लेते है! और लंका के दरबार पर पहुंचाते है! वही हनुमान जी लंकापति को यह संदेश देते है की वो माता सीता को श्री राम को सौंप कर उनसे माफ़ी मांग ले! इस पर लंकेश रावण ओर ज्यादा क्रोधित हो जाता है! और विभीषण के परामर्श पर हनुमान जी की पूँछ पर आग लगा देते है और हनुमान जी पूरी लंका को जलने के बाद माता सीता से जाने की आज्ञा पाकर वहां से चले जाते है!

रामायण के अनुसार लंका के राजा रावण के बारे में यह बाते सबको जाननी चाहिए

रावण ने किस वेश में आकर माता सीता का हरण किया

रामायण के अनुसार रावण ने जब अपनी बहन सम्पुर्न्खा से माता सीता के बारे में सुना की दो वनवासियों के साथ एक बहुत ही सुंदर स्त्री वन में रह रही है! तभी रावण माता को हरने की साजिश बनाने लगा उसने अपने एक राक्षस को हिरन का वेश बना कर भेजा! जो हिरन माता को भुत प्रिय लगा और प्रभु राम जी उस हिरन को लेन के लिए उसके पीछे गए! लेकिन वो रावण का ही एक छल था! जब रावण ने देखा कि लक्षमण अभी भी माता के साथ है तो उसने फिर एक छल सुझा और लक्ष्मण भी अपने बड़े भाई राम की मदद करने चले गए! और माता के चारो ओरएक रेखा खींच दी! तभी रावण माता के पास एक संस्यासी के वेश में भिक्षा मांगने आया! परन्तु वो लक्षमण रेखा पार नहीं कर पाया! तभी उसने माता से कहा की माता ने एक तपस्वी का अपमान किया है! और वो भूखा ही दर से लौटा रही हो! तब माता जानकी को दया आ गयी ओर भोजन को लेकर लक्ष्मण रेखा को लाँघ दिया! जैसे ही माता ने रेखा को पार किया रावण अपने असली भेष में आ गया! और माता को छल कर अपने साथ लंका ले गया!

रावण के जीवन पर केंद्रित पुस्तक

कहा जाता है की रावण ज्ञान के मामले में भुत बड़ा विद्वान और ज्ञानी था! रावण ने अपने जीवन काल के दौरान बहुत सी रचनाएँ की थी! रावण ने ही शिव तांडव स्तोत्र की रचना की थी! वही रावण की जीवन पर आधारित आधुनिक काल में आचार्य चतुरसेन द्वारा ‘वयम रक्षाम:’ नामक उपन्यास लिखा गया था! इसके आलावा पंडित मनमोहन शर्मा शाही रचित ‘लंकेश्वर’ नामक उपन्यास भी रावण के जीवन पर आधारित है!

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रावण ने माता सीता का हरण करने के बाद माता सीता को क्यों नहीं छुया था

कहा जाता है की रावण बहुत बड़ा ज्ञानी और विद्वान ब्राम्हण था! यही कारण है की कई ऐसी जगह जहाँ रावण को अच्छा माना जाता है और कही कही तो इसकी पूजा भी की जाती है! लोगों का कहना है कि वो बहुत बड़ा महान इंसान था जिसने माता सीता को हरण के बाद हाथ नहीं लगाया था! तो यह पूरा सच नहीं है! रावण ज्ञानी तो था पर उसे महान नहीं कहा जा सकता! क्योंकि उसने माता सीता को जरुर हरा था परन्तु माता को न छु पाना उसके पीछे एक श्राप था जो रावण को उसके भाई के पुत्र ने दिया था! रावण विश्व विजय होने के बाद स्वर्ग लोक पहुंचा! वहां उसकी नजर रंभा नाम की अप्सरा के ऊपर पड़ी! और रावण ने अपनी वासना पूरी करने के लिए उसके साथ दुराचार किया! और रंभा रावण के बड़े भाई कुबेर के बेटे नलकुबेर के लिए आरक्षित थी! जब यह बात नलकुबेर को पता चली तो उसने रावण को श्राप दे दिया कि आज के बाद रावण ने किसी स्त्री को बिना उसकी इच्छा के स्पर्श किया तो रावण का सर एक सौ टुकडो में बंट जायेगा! यही कारण था रावण ने माता सीता को नहीं छुआ! और माता सीता को लंका में 11 माह और 14 दिन बिताने पड़े थे!

 

 

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