Second World War(द्वितीय विश्व युद्ध का आरम्भ और परिणाम)

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Second World War(द्वितीय विश्व युद्ध का आरम्भ और परिणाम)

द्वितीय विश्व युद्ध शुरुआत कैसे हुई

हैलो दोस्तों आज हम बात करेंगे द्वितीय विश्व युद्ध के बारे में जिसने पूरी दुनिया को पलट कर रख दिया था| यह युद्ध 1939 से 1945 तक चला था| द्वितीय विश्व युद्ध में पृथ्वी की जनसँख्या के 3% लोग मारे गए थे और करोड़ों लोग घायल हो गए थे वही अरबों की सम्पति का नुक्सान हो गया था| द्वितीय विश्व युद्ध को Globle WAR या Total WAR भी कहा जाता है वो इसलिए क्योंकि इस युद्ध में सैनिकों के साथ साथ आम नागरिक भी शामिल हुए थे| इस विश्व युद्ध में देश में सैनिकों ने घुस कर आम नागरिकों के ऊपर गोले बारूद बरसाए थे| जिस कारण इस विश्व युद्ध में कोई भी ऐसे नागरिक नहीं थे जिनके ऊपर खतरा न हो| यही कारण है की इसे टोटल वॉर कहा जाता है| इस युद्ध में दो मुख्य शक्तियां थी जिनमें से एक थी Axis पॉवर जिसमें जर्मनी, इटालिया, जापान, बुलगेरिया, हंगेरी, और रोमानिया जैसे देश शामिल थे| और दूसरी तरफ Allies पॉवर थी जिसके सदस्य देशों में अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, USSR, ऑस्ट्रेलिया, ब्राज़ील, चाइना, कैनाडा, नीदरलैंड, ग्रीस, पोलैंड, नोर्वे, डेनमार्क आदि देश शामिल थे| जहाँ पर इटली पहले विश्व युद्ध में Allies पॉवर में था वही द्वितीय विश्व युद्ध में यह Axis पॉवर में शामिल हो गया था|

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द्वितीय विश्व युद्ध होने के क्या कारण थे

जहाँ तक हम सबको मालूम है कि किसी भी घटनाक्रम के पीछे कोई न कोई कारण होता है वही द्वितीय विश्व युद्ध के पीछे भी बहुत से कारण छिपे हुए थे जिस कारण यह विश्व युद्ध छिड़ा|

द्वितीय विश्व युद्ध का पहला मुख्य कारण प्रथम विश्व युद्ध क्योंकि पहले विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी पूरी तरह घुटनों में आ गया था| फ्रांस और ब्रिटेन ने विवादित वर्शल्स करार के जरिये जर्मनी के नागरिकों की स्थिति को बद से बदतर कर दी थी| जिस कारण जर्मन में रोष और आक्रोश बड़ने लगा था| और उन जर्मन में से एक अडोल्फ़ हिटलर था| जिसने नाज़ी के जरिये जर्मन की सत्ता को हासिल किया था| और दुश्मन देशों स बदला लेने का प्लान बनाया| हिटलर ने दुश्मन देशों से हत्याय गए जर्मनी के प्रदेशों को एक एक कर वापिस ले लिया| और आखिर में जर्मनी का सबसे बड़ा भू-भाग जो पोलैंड में था उस पर भी आक्रमण कर उसे ले लिया गया| मगर हिटलर इतने से हार मानने वालों में से नहीं था वो दुसरे देशों को अपने कब्ज़े में ले लेना चाहता था| जिसके लिए उसने पोलैंड देश पर हमला कर दिया| 1 सितम्बर 1939 को दुसरे विश्व युद्ध का आरम्भ शुरू हो गया था| जर्मनी ने इस दिन सुबह के 4:45AM  को जर्मनी के सैनिक पोलैंड के अन्दर घुस गए और एक महीना होते होते जर्मनी ने पोलैंड देश को जीत लिया था| पोलैंड को जीतने के बाद छह महीने तक हिटलर शांत रहा उसने की कदम नहीं उठाया| पोलैंड को जीतने के बाद हिटलर के अगले टारगेट फ्रांस और ब्रिटेन देश थे| क्योंकि यही वो देश थे जो जर्मनी की दयनीय स्थिति के लिए जवाबदार और वर्शल्स करार के नायक थे| द्वितीय विश्व युद्ध में हिटलर जर्मन सत्ता को पुरे विश्व में फैलाना चाहता था| और हिटलर के जैसी सोच रखने वाला एक और तानाशाह इटली में पैदा हो गया था जिसका नाम मुसोलिनी था| मुसोलिनी इटालियन सत्ता को फिर से यूरोप में खड़ी करना चाहता था और रोमन राज जैसी हुकूमत को वापिस लाना चाहता था| वही तीसरी और पूर्व में जापान लड़ रहा था क्योंकि जापान दक्षिणी एशिया के देशों को जीतकर उन पर अपनी हुकूमत बनाना चाहता था|

Battle of Briten की शुरुआत कैसे हुई

अब हिटलर बहुत ज्यादा महत्वकांक्षी हो चूका था वो सभी देशों पर जर्मन राज लाना चाहता था| फ्रांस और ब्रिटेन के ऊपर हमला करने के लिए उसे और ज्यादा हथियारों और रक्षा की जरूरत थी| इसलिए उसने इस हमले को स्थगित कर दिया और उतरी यूरोप के देश नोर्वे के ऊपर हमला कर दिया| 9 अप्रैल 1940 के दिन अपनी सेना को भेजकर नोर्वे को जीत लिया| नोर्वे और जर्मनी के बीच में पड़ने वाले देश डेनमार्क को भी अपने कब्ज़े में कर लिया| लेकिन हिटलर इतने में नहीं रुका उसने कुछ ही दिनों में नीदरलैंड, वेल्जियम, लक्समबर्ग जैसे देशों को भी अपने कब्ज़े में कर लिया| 1940 को जून महिना आते आते हिटलर को लगा की उसके पास हथियार और डिफेन्स पॉवर पर्याप्त मात्रा में जमा हो गयी है इसलिए उनसे 5 जून 1940 को हिटलर से लगभग पंद्रह लाख सैनिकों को भेजकर फ्रांस पर हमला कर दिया| उस दौरान फ्रांस के पास आठ लाख सैनिक थे लेकिन उसके सामने पंद्रह लाख सैनिक दो हज़ार टेंक और पंद्रह सौ फाइटर प्लेन थे जिसको उस वक़्त हरा पाना फ्रांस के वश में नहीं था| और सिर्फ पंद्रह दिन होते ही फ्रांस को भी जीत लिया| फ्रांस और ब्रिटेन ने मिलकर जर्मनी को निचा दिखाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी थी| और वो दिन आज भी हिटलर भुला नहीं था| यहाँ पर इतिहास ने अपने आप को फिर दोहराया हिटलर ने फ्रांस के वही कैम्पिंग के जंगल में वही ट्रेन भुलवाई जिसमें लगभग 21 साल पहले फ्रांस और ब्रिटेन ने जर्मन सरकार से शरणागति पत्र पर हस्ताक्षर करवाए थे| और हिटलर ने फिर से कैम्पिंग के जंगलो पर वही बैठकर फ्रांस से शरणागति पत्र पर हस्ताक्षर करवाए| अब जर्मन सेना पुरे यूरोप को अपने कब्ज़े में ले चुकी थी| अब जर्मनी के सामने एक ही देश था जो उनके सामने झुका नहीं था वो ब्रिटेन था| ब्रिटेन समुंद्र से चारों ओर से घिरा हुआ देश है जिस कारण वो बच गया था लेकिन 1940 में हिटलर ने समुंद्री मार्ग से ब्रिटेन पर हमला करने की सोची| लेकिन उसके इस फैसले में उसका बाधा बना उसका सेनाध्यक्ष| हिटलर के सेनाध्यक्ष ने इस हमले को यह कहकर टाल दिया कि ब्रिटेन की वायुसेना बहुत मजबूत है वो हमारे ऊपर हमला कर सकते हैं| इसलिए हिटलर ने कुछ समय इंतज़ार किया और अब अपनी वायुसेना को और मजबूत बना लिया| और कुछ ही महीनों के बाद जर्मनी और ब्रिटेन के बीच घमासान युद्ध हुआ| जिसे Battle Of Briten के नाम से भी जाना जाता है| इस युद्ध में जर्मनी के 1800 और ब्रिटेन के 1000 फाइटर प्लेन नष्ट हो गए थे| महीनों तक चलने वाले इस युद्ध से हिटलर टूट गया था अगर वो यह युद्ध लगातार लड़ता रहता तो वो कभी न कभी जीत ही जाता| लेकिन इस युद्ध ने उसका धैर्य टूट गया क्योंकि कूटनीति में हिटलर इतना अच्छा नहीं था जितना वो राजनीती में था| और हिटलर न करने वाली तीन गलतियाँ कर बैठा:

जिसमे उसकी पहली सबसे बड़ी गलती यह थी कि उसने ब्रिटेन के साथ युद्ध को स्थगित कर दिया| और ब्रिटेन को बाद में हराने की बात सोचकर वो अन्य देशों में हुकूमत करने की सोचने लगा|

हिटलर की दूसरी सबसे बड़ी गलती यह थी कि उसने रसिया के साथ बिना कोई कारण ही युद्ध छेड़ दिया| रसिया के साथ युद्ध करने के लिए हिटलर ने तीस लाख सैनिक सात हज़ार टेंक्स और चार हज़ार फाइटर प्लेन भेजे| उस समय जर्मन सैनिक रसिया में घुस गए लेकिन बाद में वो रसिया सैनिकों के सामने और ठंड मौसम में ज्यादा नहीं टिक पाए और लगभग नौ लाख सैनिक मारे गए| रसियन सैनिक जर्मन सैनिकों के साथ लड़ते हुए जर्मनी के बॉर्डर तक आ गए|

हिटलर ने तीसरी गलती यह कर दी कि उसने बिना कोई कारण अमेरिका से युद्ध जारी कर दिया| जबकि वर्शल्स करार के समय अमेरिका का व्यवहार कोमल था तथा अमेरिका और जर्मनी के बीच कोई दुश्मनी भी नहीं थी|

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अमेरिका के ऊपर युद्ध की शुरुआत

जापान ने 7 दिसम्बर 1941 के दिन अमेरिका के ऊपर हमला किया उसके चार ही दिन बाद हिटलर ने अमेरिका के साथ युद्ध की घोषणा क्र दी हिटलर ने यह सोचा की जापान ब्रिटेन के सामने लौट रहा है| जो जर्मनी का दुश्मन था इसलिए दुश्मन का दुश्मन दोस्त हुआ| और इसी हड़बड़ी के चलते हिटलर ने अमेरिका के साथ युद्ध घोषित कर दिया| लेकिन इसके परिणाम जर्मनी और हिटलर के लिए बहुत घातक सिद्ध हुए| 6 जून 1944 के दिन अमेरिका ब्रिटेन और दुसरे राज्यों की सेना यूरोप में घुस गयी और जर्मनी पर हमला कर दिया जिसमें कई सैनिक मारे और वर्शल्स करार का बदला लेने वाला जर्मनी फिर से घुटनों पर आ गया था| 1943 में जर्मनी का खात्मा करने से पहले इटली को अपने कब्ज़े में कर लिया और मुसेलिनी को हिरासत में ले लिया| महीनों तक चले इस युद्ध में जर्मनी को पीछे हटना पड़ा था और क्योंकि एक ओर पश्चिम की ओर से अमेरिका ब्रिटेन और मित्र राष्ट्र की सेनाएं जर्मनी पर हल्ला बोल रही थी जबकि दूसरी और पूर्व की तरफ रसिया राजधानी बर्लिन की ओर बढ़ रही थी| इन हालात में जर्मनी की हार और तानाशाह हिटलर का अंत निश्चित था हिटलर के आखिरी दिन बर्लिन के सचिवालय के निचे बने फ्यूररबंकर कहे जाने वाले अपने आवास स्थान में गुजरे| बंकर की दीवारे बहुत मजबूत थी लेकिन बर्फ रहे गोलों ने बंकर की छत को हिल्ला क्र रख दिया था जिसके चलते हिटलर को अपना अंत सामने दिख रहा था उस वक़्त उसने अपने कुछ अफसरों को बंकर में बुलवाया उस वक़्त हिटलर के साथ 26 अफसर और 31 चौकीदार थे| रसियन के अनुसार उस वक़्त हिटलर ने कहा था कि उसे किसी भी हालात में किसी भी दुश्मन के हाथों नहीं लगना है| 30 अप्रैल 1945 यह दिन हिटलर की ज़िन्दगी का आखिरी दिन था दोपहर को ईवा ब्राउन के साथ उसने लंच किया भोजन समाप्त करने के बाद लगभग 2 बजे वो एक कमरे में गए जिसके बाहर एक चौकीदार पहरा दे रहा था| और वहां पर ब्राउन ने साईंनाईट की गोली खा ली और हिटलर ने खुद को गोली मार ली और इस तरह एक हिटलर तानाशाह का अंत हुआ| लेकिन आज भी हिटलर की मौत को आज भी एक मिस्त्री माना जाता है इस घटना को अलग अलग रूप से बताया गया है|

कैसे हुआ इस युद्ध का अंत

जर्मनी की हार के बाद यूरोप में तो द्वितीय विश्व युद्ध खत्म हो गया था लेकिन एशिया में जापान अभी भी युद्ध लड़ रहा था| जापान ने मिस्त्र देशों की नाक में दम कर रखा था उसने अमेरिका का भी बहुत नुक्सान किया था| उसने अमेरिकी और चाइनीस टापुयों को जीत लिया था इतनी तेजी से बढ़ रहा था और वो हार मानने के लिए तैयार नहीं था और यहाँ मित्र देश उसे हराकर किसी भी तरह उसे हराना चाहते थे और इस युद्ध को ख़त्म करना चाहते थे| इसलिए अमेरिका ने 6 अगस्त और 9 अगस्त 1945 दो दिन एक-एक करके जापान के हिरोसीमा और नागासाकी पर एटोमिक बोम्ब से हमला किया जिसमे हजारों जापानी निर्दोष लोग मारे गए और दुसरे विश्व युद्ध का समापन हुआ|

 

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