Biography of Jim Jones(जिम जोंस की जीवनगाथा)

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Biography of Jim Jones(जिम जोंस की जीवनगाथा)

कौन थे जिम जोंस who’s this Jim Jones

हैल्लो दोस्तों आज हम जिम जोंस के बारे में जानेंगे कि कौन थे जिम जोंस इनका दावा था कि इन्होंने लोगों के लिए एक मसीहा का जन्म लिया था| इनके बारे में क्या कह सकते है कि यह धर्मगुरु थे या कोई आर्कोलोजिस्ट इन्होंने 912 लोगों को मारा था उनके ऊपर कोई गोली नहीं चलायी थी सिर्फ इतना कहा था कि यह ज़हर का प्याला पी लो और जो उन्होंने पी लिया था| यह मैडिटेशनर थे| इन्हें हत्यारा भी कहा जाता है इनके सर पर इतना घमंड चढ़ गया था कि इसी के चलते इन्होंने उन लोगों को मार दिया था| यह हादसा 1978 में अमेरिका में यह घटना घटी थी जिस घटना ने पूरी दुनिया को हिला के रख दिया था| तो जानते है इनके बारे में कौन थे जिम जोंस:

जिम जोंस की जीवनगाथा

जिम जोंस का जन्म 13 मई 1931 को हुआ था यह अमेरिका के ग्रामीण इलाके इंडिआना में जन्मे थे| इनके पिता का नाम जेम्स थर्मन जोंस था जो कि वर्ल्ड वॉर वन के अनुभवी थे| और इनकी माता का नाम ल्य्नेत्ता पुत्नम था| यह ज्यादा आमीर नहीं थे और इनका जीवन बहुत संघर्ष में बीता था| और जिम जोंस को कभी भी अपने परिवार से प्यार नहीं मिला था जबकि यह अपने परिवार में इकलौते बेटे थे| जब यह 3 साल के थे तब इनका परिवार निन्याना में शिफ्ट हो गया था और यह बहुत ज्यादा गरीब थे| और यह बहुत ज्यादा इंटेलीजेंट थे इनका दिमाग बहुत ज्यादा तेज था| पढ़ाई में यह इतने तेज थे कि टीचर भी इनके सवालों का जवाब नहीं दे पाते थे क्योंकि इन्होंने बहुत छोटी सी उम्र में पढ़ना शुरू कर दिया था| यह इधर घूमते रहते थे तो इनके पड़ोस में एक औरत रहती थी जिसने इनको देखा और वो क्रिस्चन थी जो रोज चर्च जाया करती थी| उस औरत ने इनको देखा की यह बहुत छोटा लड़का है और इसको परिवार में किसी का भी प्यार नहीं मिलता है तो उनसे इनसे कहा की तुम मेरे साथ चर्च चला करो और इन्होंने रोज उस औरत के साथ चर्च जाना शुरू कर दिया था| और जब इन्होंने चर्च जाना शुरू किया तो चर्च की टीचिंग ने इनको इतना ज्यादा स्ट्राइक किया कि इन्होंने चर्च में अपनी सेवा देना शुरू कर दी| जिम जोंस सिर्फ 10 साल के थे जब इन्होंने अपना ग्रुप बना लिया था और तभी इन्होंने सोचा था कि यह खुद का चर्च बनवायेंगे| इनकी बहुत बड़ी खासीयत थी कि यह लोगों का ब्रेन वाश कर देते थे| इनको इंसानों से ज्यादा जानवरों से बहुत ज्यादा लगाव था अगर कोई भी जानवर मरता था तो उसका फ्यूनरल करते थे और बाकी बच्चों को भी फ्यूनरल करने के लिए कहते थे| दिसम्बर 1948 में इन्होंने Richmond High School से इन्होंने होनोर्स की डिग्री हासिल की| इनके पास पैसा था नहीं तो इन्होंने हॉस्पिटल में काम करना शुरू किया| इन्होंने चार साल तक हॉस्पिटल में काम किया| 1948 आते आते जिम जोंस को बहुत ज्यादा ज्ञान आ गया था| यह किताबें बहुत ज्यादा पढ़ते थे एक टाइम ऐसा आ गया था कि इन्होंने भगवान् को मानना ही बंद कर दिया था यह कहते थे कि यह खुद ही भगवान् है| और यह गाँधी जी को बहुत मानते थे इन्होंने अपने बेटे का नाम स्टीफन गाँधी जोंस रखा था| और यह लोगों की कमजोरियां के ऊपर ज्यादा फोकस करते थे और इसी तरह यह सबका ब्रेन वाश कर देते थे| इन्होंने एक बड़ा ग्रुप तैयार केर लिया था जिसको पीपल्स टेम्पल( लोगों का मंदिर) बोला गया और इस ग्रुप को धर्म से जोड़ दिया| उस दौरान अमेरिका में ब्लैक और वाइट का बहुत मुद्दा चला हुआ था क्योंकि जो गोरे लोग थे वो काले लोगों के साथ बुरा व्यबहार किया करते थे और हमेशा गोरे लोगों को ही प्राथमिकता मिलती थी जिस कारण काले लोगों ने अमेरिका में विरोध कर दिया था| और उस दौरान जिम जोंस अपने हाथों में वाईवल लिए गली गली घुमा करते थे और रेश्योल क्वालिटी की बात किया करते थे जिस कारण काले लोग इनकी तरफ खींचे चले आते थे| क्योंकि उस समय कोई भी गोरा रेश्योल क्वालिटी की बात नहीं किया करता था| और जिस हॉस्पिटल में यह काम किया करते थे उसी हॉस्पिटल में उनकी मुलाकात मेर्सलिन बाल्डविन से हुई थी जिनसे जोंस ने शादी की थी| मेर्सलिन इनसे चार साल बड़ी थी| उसके बाद 1951 में यह इंडिआनापलिस में शिफ्ट हो गए| वहीँ पे इन्होंने नाईट क्लास लेना शुरू कर दी थी|

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कैसी थी जिम जोंस की स्ट्रगल वाली लाइफ

1951 में यह जब इंडिआनापलिस में शिफ्ट हुए थे तब 1952 में इन्होंने एक ऐसे चर्च को ज्वाइन किया जो इनकी सोच से बहुत ज्यादा मिलता झुलता था| और जिसे मेथोडिस्ट चर्च कहा जाता था| यह बहुत ज्यादा सामाजिक सोच रखने वाले व्यक्ति थे यह हमेशा चाहते थे कि सभी को एक सामान समझा जाये| और इनकी यह बात चर्च को बहुत पसंद आई और इन्होंने मेथोडिस्ट चर्च में पढ़ाना शुरू कर दिया| और 1952 के बाद ही जिम जोंस को लगा कि वो खुद भगवान् है| क्योंकि यह सोचते थे की मैं बाकी सभी लोगों से अलग हूँ और मुझमे देविक शक्तियां आ गयी है| लोग इनके पास लगे अपनी समस्याओं को लेकर आने लगे और यह उनकी समस्याओं का समाधान करने लगे थे| कुछ लोगों को यह भी लगा की जिम जोंस सच में भगवान् है| लेकिन यह सब जिम जोंस की बहुत बड़ी गलतफहमी थी क्योंकि ऐसा कुछ भी नहीं था| 1956 में जिम जोंस ने अपना ही चर्च बनवा लिया| सन् 1956 में इन्होंने एक बहुत बड़ा धार्मिक समेल्लन संगठन किया और यही बाद में जाकर The Peoples Temple बना| क्योंकि उस दौरान इनका बहुत बड़ा नाम हो गया था| और यह पीपल्स टेम्पल अमेरिका में बहुत बड़ा संगठन बन गया लोग इसको ज्वाइन करने लगे थे| उसके बाद जोंस ने कुछ बच्चों को गोद लिया और जिन्हें बाद में रेनबो फॅमिली कहा गया जो सभी काले थे| जोंस गोरे थे इसलिए काले इनको ज्यादा फॉलो करते थे क्योंकि यह उनके हक में बात करते थे और जो इन्हें भगवान् का दर्ज़ा देने लगे थे| जितने इनके फ़ॉलोवर थे उतने ही इनके दुशमन भी बन गए थे क्योंकि यह काले लोगों के हक्क के बारे में बात करते थे जिस कारण गोरे लोग इनके दुशमन बन गए थे|

जिम जोन्स ब्राज़ील क्यों गए थे

पहले यह ब्राज़ील गए वहां पर इन्होंने टेम्पल को स्थापित किया जहाँ उनका एक बहुत बड़ा ग्रुप था| इनके भक्त बहुत बड़े बड़े लोग थे जो इनके ऊपर पैसा लगाते थे| इन्होंने अपने भक्तों के लिए टेम्पल बनाये और रेस्ट हाउस भी बनाये ताकि इनके पास आने वाले किसी भी भक्त को ठरहने के लिए कोई परेशानी न हो| सन् 1962 में जिम जोंस ने एक आर्टिकल लिखा जिसमे यह लिखा की दुनिया न्यूक्लियर से ख़त्म होने वाली है और जिसमे उन्होंने दुनिया 9 सेफ जगहों के बारे में भी लिखा| और जिस कारण यह ब्राज़ील चले गए| जब यह ब्राज़ील में थे तब इन्होंने अपनी पहली ट्रिप गयाना में की थी| और उन्होंने वहां देखा कि गयाना में जंगल ही जंगल है तो इन्होंने अपनी लोकेशन शिफ्ट करके गयाना में रहने का फैसला किया|

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ब्राज़ील के बाद दोबारा ये इंडिआना वापिस आ गए क्योंकि जब यह ब्राज़ील गए थे तो इनकी मेम्बरशिप जो इन्होंने इंडिआना चर्च में ली थी वो कम हो रही थी जिस कारण इन्हें वापिस अपने घर आना पड़ा| इसके बाद इन्होंने न्यूक्लियर वॉर की बात करना शुरू कर दिया और सबको बताया की यह भगवान् है इसलिए इस वॉर से यही लोगों को बचा सकते है| उसके बाद यह San Francisco गए वहां पे इन्होंने टेम्पल बनाये और बहुत बड़ा विला बना दिया जहाँ पर इनके भक्तों ने खूब पैसा लगाया| जिम जोंस औरतों पे बहुत विशवास करते थे इसलिए इन्होंने अपनी सारी जिम्मेदारीयां औरतों को दे राखी थी इनके बारे में यह भी बताया गया कि यह बहुत ज्यादा मात्रा ड्रग्स लेने लग पड़े थे| इनके बहुत से राजनेताओं के साथ अच्छे संबंध भी बनाये थे| इनका पीपल्स टेम्पल हर जगह फ़ैल गया था| लोगों को यह भी नहीं मालूम होता था की पीपल्स टेम्पल के अन्दर क्या चल रहा है जब इसे कोई ज्वाइन करता था वो ही जान पाता था| लेकिन इनकी एक शर्त भी थी कि जो भी इसे ज्वाइन करेगा उसे बाहर नहीं आने दिया जाता था| और कुछ लोग यहाँ के सामने आने लगे जिनका कहना था की अन्दर उन्हें बहुत टोर्चेर किया जाता है| और अगर हम ग्रुप से बाहर जाने की बात करते है तो हमे कोड़े मारे जाते है| जिम जोंस की इन आदतों को देखकर एक ग्रुप उनसे अलग हो गया| 15 नवम्बर 1978 को एक अधिकारी लियो रयान ने यह दायित्व उठाया की वो इसकी जाँच करेगें और उस वक़्त जिम जोंस गयाना शिफ्ट हो गए थे| वहां पर इन्होंने जंगल को साफ़ करके अपना बहुत बड़ा आवास बनाया था जिसे जोंस टाउन के नाम से जाना जाता था| लियो रयान मीडिया के साथ जोंस टाउन में दौरा करने गए| वहां पर उनका अच्छे से वहां पर स्वागत किया गया उस वक़्त लियो रयान को वहां पे सब ठीक लगा लेकिन लियो रयान जब वहां दोबारा 18 नवम्बर 1978 गए तब वहां पर मौजूद पंद्रह लोगों ने कहा कि उन्हें वहां से बाहर निकलना है| जिस कारण जिम जोंस बहुत गुस्सा हो गए उन्होंने लियो रयान को मारने के लिए अपने आदमियों को भेजा और लियो रयान सहित तीन लोग मारे गए| जो मीडिया वाले लियो के साथ गए थे वो वहां से भागने में कामयाब हो गए| और जिस कारण जिम जोंस को डर सताने लगा की वहां पे फोर्सेज आएँगी इसलिए उन्होंने उसी रात (18 नवम्बर 1978) को शाम के समय इकठ्ठा किया| वो सभी 918 लोग थे| उसके बाद उन्होंने कुछ इंजेक्शन मंगवाए जिनमें साईंनाईट भरा था और कुछ ड्रिंक मंगवाए जिनमें ज़हर था| जब लियो रयान के ऊपर हमला हुआ उसके ठीक एक घंटे के बाद पहले वहां पे मौजूद लोगों का ब्रेन वाश किया फिर उन्हें कहा गया कि यह ज़हर पी लो| और 918 लोगों ने बिना कुछ सोचे समझे यह ज़हर पी लिया जिनमें 912 लोगों की जान चली गयी थी जिसमें 304 बच्चे शामिल थे| पहले यह ज़हर बच्चों ने पिया उसके बाद बड़ो ने पिया और एक के बाद एक लाशें वहां गिरती रही| जिम जोंस ने जिसे रिवोल्यूशनरी सुसाइड का नाम दिया और उसी रात जिम जोंस ने भी खुद को गोली मार ली| जिसमे उनकी बीवी और बेटा भी इसमें मारा गया| जब उस स्थान का मुआना किया गया तो वहां पर लाशे ही लाशे नज़र आई जिस कारण अमेरिका सरकार ने उस घटना के दौरान प्रण लिया कि दोबारा अमेरिका ऐसे किसी को बढावा नहीं दिया जायेगा| जिस कारण ओशो को भी इसका सामना करना पढ़ा था क्योंकि उन्होंने भी रजनीशपुरम की मांग की थी|

 

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