महान आचार्य चाणक्य की जीवनगाथा(Biography of Chankya)

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महान आचार्य चाणक्य की जीवनगाथा(Biography of Chankya)

हैलो दोस्तों आज के इस पोस्ट में हम एक ऐसे महान आचार्य के बारे में बात करने वाले है जिन्हें शायद ही कोई होगा जो नहीं जानता होगा | आज के इस पोस्ट में हम आचार्य चाणक्य के बारे में पढेंगे और उनके जीवन के बारे में जानेंगे | चाणक्य को कौटिल्य के नाम से भी जान जाता है उन्हें इंडियन किंग्स के नाम से भी जाना जाता है | उनके जीवन के बारे में इतिहास में ज्यादा नहीं है परन्तु इतिहास के कई राजाओं के साम्राज्य के दौरान् उनका जिक्र किया गया है | उनके द्वारा अर्थशास्त्र नामक ग्रंथ में राजनीति, अर्थनीति, समाजनीति इत्यादि का उल्लेख किया गया है | विष्णुपुराण, भगवत इत्यादि पुराणों में चाणक्य का नाम आया है | तो जानते है आचार्य चाणक्य के जीवन के बारे में महत्वपूर्ण बाते:-

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बायोग्राफी ऑफ़ चाणक्य

चाणक्य का जन्म को 375 ईसापूर्व में मन गया है | यह चन्द्रगुप्त मौर्य के महामंत्री थे | चाणक्य ने नंदवंश का नाश करके चंदगुप्त मौर्य को राजा बनाया था | चाणक्य जब पैदा हुए थे तब इनके दांत थे और इनको यह बोला गया था कि यह बालक राजा बनेगा | चाणक्य ठाट-बाट से दूर एक छोटी सी कुटिया में रहा करते थे | यह उस दौरान ब्राम्हण वर्ग में पैदा हुए थे लेकिन जब यह पैदा हुए थे तब यह सुंदर नहीं थे | चाणक्य नन्द वंश के राजा धनानंद के यहाँ अखंड भारत की बात करने और पोरव राष्ट्र के यमन शासक सेल्युकस को भगा देने की बात करने गए थे परन्तु धनानंद ने उनका यह निर्णय ठुकरा दिया क्योंकि पोरस राष्ट्र के राजा की हत्या धनानंद ने ही यमन के शासक के हाथो करवाई थी | और यह बात जानकर चाणक्य को बेहद दुःख हुआ और उन्होंने धनानंद के सामने यह प्रतिज्ञा की कि जब तक मैं नंद वंश का नाश न कर दूं तब तक अपनी शिखा नहीं बांधूंगा | और उन्ही दिनों राजकुमार चन्द्रगुप्त को राज्य से निकाल दिया गया था | चन्द्रगुप्त ने चाणक्य से मेल किया और दोनों ने मिलकर पाटिलपुत्र पर चढ़ाई की और नंदों को युद्ध में हराकर नंद वंश को समाप्त कर दिया था | वहीँ नंदों के नाश की गाथा के बारे में कई कथाएं है कहीं लिखा गया है की चाणक्य ने महानंद के यहाँ निर्माल्य को भेजा तो कहीं कहा गया है विषकन्या को भेजा गया था | लेकिन चन्द्रगुप्त को नंदों का नाश करने के बाद भी महानंद के मंत्री राक्षस की नीतियों के कारण मगध का सिहांसन को हासिल करने में बहुत कठिनाइयों का सामना करना पढ़ा था | अंत में चाणक्य ने अपनी नीतियों से राक्षस को प्रसन्न किया और चन्द्रगुप्त का मंत्री बना दिया था |

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चाणक्य के जन्म के बारे में किसी को भी सही प्रमाण नहीं मिला है कि उनका जन्म कहाँ हुआ था किसी का कहना है कि वो पंजाब में पैदा हुए थे तो किसी का कहना है कि वो केरल में पैदा हुए थे | वि. के. सुब्रमणयम के अनुसार सिकंदर जब भारत आया था तब उसकी भेंट आचर्य चाणक्य से हुई थी और उस दौरान अलेक्जेंडर का आक्रमण तक्षशिला में हुआ था तो उनका जन्म स्थान तक्षशिला रहा होगा | वो एक गरीब ब्राम्हण परिवार से संबधित थे जिनका गुजारा बहुत मुशिकल से हुआ करता था | उनके पिता का नाम चणक था जिस कारण उनका नाम चाणक्य पढ़ा | उनका जीवन बहुत मुशिकलों में बीता था | जब वो पैदा हुए थे तब वो कुरूप थे और उनकी शिक्षा के बारे में कहीं भी नहीं बताया गया है | लेकिन बुद्धि के मामले में वो बहुत विद्वान थे | वो कुरूप तो थे परन्तु वो बहुत ज्यादा बलवान थे | यह बचपन से ही बहुत बड़े राष्ट्रप्रेमी और स्वाभिमानी थे | चाणक्य की मृत्यु 283 ईसा पूर्व को मानते है लेकिन इसका कोई भी प्रमाण नहीं हिया कि इनकी मृत्यु कैसे हुई थी |

इनकी रचनाओं की बात की जाये तो इनकी मुख्य रचना अर्थशास्त्र है इसके अलावा भी इनकी बहुत सी रचनाएँ है | चाणक्य की नीतियों के ऊपर बहुत से विद्वानों ने बहुत सी रचनाएँ की है |

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